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Hindi Grammar PDF Hindi Vyakaran Book

Hindi Grammar PDF Hindi Vyakaran Book -sarkaripdf.com
Written by admin

[NEW*2018] Hindi Grammar PDF Hindi Vyakaran Book:- आज हमारी टीम उन सभी विद्यार्थियों के लिए बहुत ही important pdf आपके साथ share कर रही   है जो SSC, UPSC, Bank, IAS, PCS, Railway, Police, vdo ग्राम विकास अधिकारी या किसी भी competitive exam का form भरे है या उसकी तैयारी कर रहे है क्योकि इसमे लगभग सभी one day exam में हिंदी सामान्य रूप से पूछा जाता है इस को ध्यान मर रखते हुए आज हमारी टीम द्वारा Hindi Grammar eBook Download बेहतरीन हिंदी व्याकरण PDF share किये जा रहे है  जो की आगामी परीक्षा में पूछे जा सकते है तो students बिना देर किये तुर्रंत ही [NEW*2018] Hindi Grammar PDF Hindi Vyakaran Book बेहतरीन हिंदी व्याकरण PDF को download करे |

Hindi Grammar eBook Download बेहतरीन हिंदी व्याकरण PDF

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जो सभी One Day Exams के साथ सभी Competitive Exams में Helpful होता है. ठीक उसी तरह आज भी हम आपके लिए Hindi Grammar PDF Hindi Vyakaran Book लेकर आये हैं. जिसको आप नीचे दिए गए download बटन से Download कर सकते हैं. जैसा की आप जानते हैं कि हिंदी एक ऐसा विषय है जो हर प्रतियोगी परीक्षा में आता है. इसीलिए आज हम Hindi Vyakran PDF लेकर आये हैं. ये Notes SSC CGL, SSC CHSL, SSC JE, SSC MTS, Police, Railway, Bank और भी बाकी प्रतियोगी परीक्षाओं में आते हैं

सबसे पहले नीचे दिए गए लेख मे आप पढ सकते है, की हिन्दी व्याकरण होता क्या ? अर्थात हिन्दी व्याकरण की परिेभाषा से शुरुआत करते है, नीचे दिए गए कुछ लेख को आपको ध्यानपूर्वक पढना ज्यादा उचित रहेगा क्योकी उपलब्ध जानकारी हिन्दी ग्रामर अर्थात Hindi Vyakran के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

Hindi Grammar Book PDF

मनुष्य मौखिक एवं लिखित भाषा में अपने विचार प्रकट कर सकता है और करता रहा है किन्तु इससे भाषा का कोई निश्चित एवं शुद्ध स्वरूप स्थिर नहीं हो सकता। भाषा के शुद्ध और स्थायी रूप को निश्चित करने के लिए नियमबद्ध योजना की आवश्यकता होती है और उस नियमबद्ध योजना को हम व्याकरण कहते हैं।

परिभाषा- व्याकरण वह शास्त्र है जिसके द्वारा किसी भी भाषा के शब्दों और वाक्यों के शुद्ध स्वरूपों एवं

शुद्ध प्रयोगों का विशद ज्ञान कराया जाता है।

भाषा और व्याकरण का संबंध- कोई भी मनुष्य शुद्ध भाषा का पूर्ण ज्ञान व्याकरण के बिना प्राप्त नहीं कर सकता। अतः भाषा और व्याकरण का घनिष्ठ संबंध हैं वह भाषा में उच्चारण, शब्द-प्रयोग, वाक्य-गठन तथा अर्थों के प्रयोग के रूप को निश्चित करता है।व्याकरण के विभाग- व्याकरण के चार अंग निर्धारित किये गये हैं-

  • वर्ण-विचार
  • शब्द-विचार
  • पद-विचार
  • वाक्य विचार

Hindi Vyakaran PDF

Content:

Shabd Vichaar; Sangya; Upsarg aur Pratyya; Ling; Vachan; Karak; Sarvnaam; Visheshan; Kriya; Vachya; Kaal; Avvya; Sandhi; Samas; Vakya; Viraam Chinha; Anek Shabdo ke liye ek Shabd; Vipreetharthak Shabd; Shrutisum Bhinnarthak Shabd; Paryaayvachi Shabd; Ekarthak Shabd; Anekarthak Shabd; Sankshepan; Muhaavra; Kahavatein athva Lokoktiyaan; Vartani-Sambandhi Ashudhiyaan; Vakya-Sambandhi Ashudhiyaan; Patrachaar; Alankaar; Pallavan ya Bhaav-Vistaar; Hindi Anuvaad; Chhand; Aadhunik Bhashayein; Hindi Sahitya ki Pramukh Pravartiyaan evam Visheshtaayein; Hindi Sahitya ki Nai Vidhaayein; Prasidh Rachnayein evam Rachnakaar; Prasiddh Bharatiya Kavi, Bhasha; Varn Vichaar; Lekhak evam Bhashayein. Bhasha; Varn Vichaar; Shabd Vichaar; Sangya; Upsarg aur Pratyya; Ling; Vachan; Karak; Sarvnaam; Visheshan; Kriya; Vachya; Kaal; Avvya; Sandhi; Samas; Vakya; Viraam Chinha; Anek Shabdo ke liye ek Shabd; Vipreetharthak Shabd; Shrutisum Bhinnarthak Shabd; Paryaayvachi Shabd; Ekarthak Shabd; Anekarthak Shabd; Sankshepan; Muhaavra; Kahavatein athva Lokoktiyaan; Vartani-Sambandhi Ashudhiyaan; Vakya-Sambandhi Ashudhiyaan; Patrachaar; Alankaar; Pallavan ya Bhaav-Vistaar; Hindi Anuvaad; Chhand; Aadhunik Bhashayein; Hindi Sahitya ki Pramukh Pravartiyaan evam Visheshtaayein; Hindi Sahitya ki Nai Vidhaayein; Prasidh Rachnayein evam Rachnakaar; Prasiddh Bharatiya Kavi, Lekhak evam Bhashayein.

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  • सर्वनाम – Sarvnam in Hindi Vyakaran,
  • विशेषण – Visheshan in Hindi Vyakaran,
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  • क्रियाविशेषण – Kriya Visheshan in Hindi Vyakaran,
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  • पुनरुक्ति – Punrukti in Hindi Vyakaran,
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  • पर्यायवाची शब्द – Paryayvachi Shabd Hindi Vyakaran,
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  • अनेक शब्दों के लिए एक शब्द – Anek Shabdon Ke Liye Ek Shabd,
  • हिंदी कहावतें – (Hindi Kahawat),
  • हिंदी मुहावरे – Hindi Muhavare,
  • अलंकार – Alangkar in Hindi Vyakaran,
  • छंद – Chhand in Hindi Vyakaran,
  • रस – Ras in Hindi Vyakaran,

Book Summary – हिंदी व्याकरण की Complete जानकारी इस बुक में दी गई है. इस किताब तो आपके साथ शेयर करने का कारण है क्युकी बहुत से छात्रों ने इस किताब को पसन्द किया है लोकप्रिय हिंदी व्याकरण सभी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए एक अनिवार्य गाइड है। यह एक व्यापक पुस्तक भी है जो किसी भी सामान्य परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए उपयोगी होती है। यह उन छात्रों के लिए जरूरी है जो अपने हिंदी व्याकरण और रचना को सीखना और सुधारना चाहते हैं।

मित्रों, आज-कल व्याकरण पर बाजार में अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं। लेकिन फिर भी हमें इन पुस्तकों को लिखने की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई क्योंकि जब भी कोई छात्र यह प्रश्न करता है कि वह हिन्दी व्याकरण के लिए कौन सी किताब को पढ़े तो हम उसे कोई प्रमाणित पुस्तक का नाम नहीं बता पाते। कुछ पुस्तकें है भी तो वह विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर नहीं लिखी गई हैं तथा बहुत ही विस्तार पूर्वक लिखी गई है। जिन्हें पढ़ने के बाद छात्र उब जाते है तथा व्याकरण की कोई बात समझ नहीं पाते।

ऐसी परिस्थिति में छात्रों के लिए ऐसी पुस्तक की नितान्त आवष्यकता थी जिसकी भाषा सरल, विवेचन स्पश्ट और विषय का प्रतिपादन संक्षिप्त रूप में किया गया हो। Vyakaran की कुछ ऐसी ही books का संग्रह आपको डाउनलोड करने के लिए दिया जा रहा हैं। इन्हें पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंकों पर क्ल्कि करके download करें-

नीचे हमने उपलब्ध hindi grammar PDF Notes मे जो भी कुछ हिन्दी व्याकरण से सम्बन्धित उपलब्ध है, उसे नीचे टापिक के माध्यम से आपके लिए लिख दिया है, जिसमे अपनी जरुरत के हिसाब से उपलब्ध टापिक को पढ सकते है।

Hindi Vyakaran Book for Competition

व्याकरण- व्याकरण वह विद्या है जिसके द्वारा हमे किसी भाषा का शुद्ध बोलना, लिखना एवं समझना आता है।

भाषा की संरचना के ये नियम सीमित होते हैं और भाषा की अभिव्यक्तियाँ असीमित। एक-एक नियम असंख्य अभिव्यक्तियों को नियंत्रित करता है। भाषा के इन नियमों को एक साथ जिस शास्त्र के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है उस शास्त्र को व्याकरण कहते हैं।

वस्तुतः व्याकरण भाषा के नियमों का संकलन और विश्लेषण करता है और इन नियमों को स्थिर करता है। व्याकरण के ये नियम भाषा को मानक एवं परिनिष्ठित बनते हैं। व्याकरण स्वयं भाषा के नियम नहीं बनाता। एक भाषाभाषी समाज के लोग भाषा के जिस रूप का प्रयोग करते हैं, उसी को आधार मानकर वैयाकरण व्याकरणिक नियमों को निर्धारित करता है। अतः यह कहा जा सकता है कि-

व्याकरण वह शास्त्र है, जिसके द्वारा भाषा का शुद्ध मानक रूप निर्धारित किया जाता है।

व्याकरण के प्रकार

(1) वर्ण या अक्षर
(2) शब्द
(3)वाक्य

व्याकरण के अंग :

व्याकरण हमें भाषा के बारे में जो ज्ञान कराता है उसके तीन अंग हैं- ध्वनि, शब्द और वाक्य। व्याकरण में इन तीनों का अध्ययन निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत किया जाता है-
(1) ध्वनि-विचार (2) पद-विचार (3) वाक्य-विचार

Hindi Vyakaran Book PDF संज्ञा और इसके भेद

संज्ञा किसे कहतें है? संज्ञा के भेद कितने होते है। आदि से सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी के लिए हमारे इस लेख को पढें। हमने अपने इस लेख में संज्ञा कि पूरी जानकारी (हिन्दी व्याकरण) बहुत ही साधारण शब्दो में लिखा गया है। Students हम आपको बता दें कि यहाँ पर हमने जो उदाहरण लिखे है। वो बहुत ही महत्वपूर्ण है। तो आप हमारे इस लेख को ध्यान से पढें और याद करलें यह One day Exams के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होगा।

संज्ञा किसे कहते है

संज्ञा- अर्थात नामः यह भी कहा जा सकता है कि किसी का नाम ही उसकी संज्ञा है, इससे ही वह जाना जाता है।

किसी व्यक्ति, वस्तु स्थान या भाव के नाम को भी संज्ञा कहते है।

जैसे-

राम, श्याम, भारत, जापान, मेज, कुर्सी, कलम, होली, दिवाली, गंगा, यमुना पूरब, पश्चिम इत्यादि।

उदाहरण-

दिन निकला आया। पक्षी चहचहाने लगे। आकर्षक विद्यालय जाने की तैयारी करने लगा। सूर्य की रोशनी से उपवन को सौन्दर्य खिल उठा।

संज्ञा तीन प्रकार की होती है लेकिल कुछ विद्वानों नें 5 प्रकार के भेद को स्वीकार किया है। जो इस प्रकार है-

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun)
  • जातिवाचक संज्ञा (Common Noun)
  • भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun)
  • द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun)
  • समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun)

व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun) Hindi Grammar PDF

जिस शब्द से किसी एक वस्तु या व्यक्ति को बोध हो तो उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते है।

जैसे-

व्यक्तियों के नाम– विवेकानन्द, भगत सिंह, सुभाष चन्द्रबोष, बालगंगाधर तिलक, राम श्याम।

समुद्रो के नाम– प्रशान्त महासागर, हिन्द महासागर, काला सागर, भूमध्य सागर।

दिशाओं के नाम– पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण।

देशों के नाम– भारत, अमेरिका, चीन, बर्मा, पाकिस्तान

राष्ट्रीय जातियों के नाम– भारतीय, जापानी, अफगानी, रूसी, अमेरिकी।

पर्वतों के नाम– हिमालय, विन्ध्याचल, अलकनन्दा, कराकोरम।

नदियों के नाम– गंगा, यमुना, कृष्णा, कावेरी, सिन्धु, बोल्गा।

नगरों, चौंको और सड़को के नाम– अशोक मार्ग, वाराणसी, इलाहाबाद, चाँदनी चौक, बन्द रोड़, बैंक रोड़।

पुस्तकों के नाम– रामचरितमानस, ऋग्वेद, सामवेद इत्यादि।

ऐतिहासिक युद्धों और घटनाओं के नाम– अक्टूबर-क्रान्ति, पानीपत की लडाई, सिपाहि विद्रोह।

जातिवाचक संज्ञा ( Common Noun) Hindi Grammar PDF

वे शब्द जिनसे एक ही जाति का अथवा प्राणियों, वस्तुओं, स्थानों का बोध हो तो, उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहते है।

जैसे-

सम्बन्धियों, व्यवसायों पदों और कार्यो के नाम– माता, पिता, भाई, बहन, मंत्री, टीचर, चोर, नाई, ठग।

प्राकृतिक तत्वों के नाम– वर्षा, बिजली, ज्वालामुखी, आंधी, भूकम्प।

वस्तुओं के नाम– कम्प्यूटर, कुर्सी, मेज, पुस्तक, कलम, मकान।

पशु-पक्षियों के नाम– गाय, भैंस, बैल, घोड़ा, कौआ, तोता, मैना।

भाववाचक संज्ञा ( Abstract Noun) Hindi Grammar PDF

जिन संज्ञा शब्दों से किसी वस्तु, स्थिति, भाव और दाय आदि का पता चलता है तो उन्हे भाववाचक संज्ञा कहते है।

जैसे-

क्रिया से– घबराहट, सजावट, दौड़, चढाई, बहाव, मारना।

विशेषण से– कठोरता, मिठास, गर्मी, सर्दी, चतुराई इत्यादि।

सर्वनाम से– अपनापन, ममता, ममत्व, निजत्व।

जातिवाचक संज्ञा से– बुढापा, लड़कपन, मित्रता, दासत्व, पण्डिताई इत्यादि।

अव्यय से– वाहवाही, शाबाश, दूरी, समीप्य इत्यादि।

द्रव्यवाचक संज्ञा ( Material Noun) Hindi Grammar PDF

जिन संज्ञा शब्दो से किसी द्रव्य या पदार्थ का बोध हो तो उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है। द्रव्यवाचक संज्ञाओं को गिना नही जा सकता, उनका केवल माप-तौल ही होता है।

जिन संज्ञा शब्दो में केवल माप-तौल वाली वस्तुओं का बोध होता है उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है।

जैसे-

दूध, दही, पनीर, तेल, सोना, चाँदी, आदि।

समूहवाचक संज्ञा ( Collective Noun) Hindi Grammar PDF

जिन संज्ञा शब्दों से किसी समूह का बोध होता है तो उसे समूहवाचक संज्ञा कहते है।

जैसे-

सेना, टोली, भीड़, मण्ड़ली, गिरोह, काफिला, सभा इत्यादि।

नोट– यह सभी को एक इकाई में व्यक्त करने के कारण एकवचन प्रयुक्त किये जाते है।

Hindi Grammar Questions Answer

Q1. निम्नलिखित में से कौन सा शब्द विशेषण नहीं है

क. परिचय
ख. स्वस्थ
ग. शिक्षाप्रद
घ. संपन्न

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा शब्द विशेषण है

क. पुरुष
ख. परिष्कार
ग. तालव्य
घ. कुटुम्ब

Q3. निम्नलिखित में कौन सा विकल्प भविष्य काल का द्योतक हैं

क. गीता खाना पका रही है
ख. सोहन पढाई कर रहा है
ग. मुझे दिल्ली जाना है
घ. उसने मुझे पुस्तक दी थी

Q4.रिक्त स्थानों की पूर्ति दिये गये विकल्पों से उचित सर्वनाम /विशेषण चुनकर करें अभी सरोवर में — जल है

क. थोड़ा
ख. छोटा
ग. मोटा
घ. घना

Q5. रिक्त स्थानों की पूर्ति दिये गये विकल्पों से उचित सर्वनाम /विशेषण चुनकर करें —– लडका बहुत चालाक है

क. वह
ख. उस
ग. आप
घ. वे

Q6. इनमें से कौनसा शब्द पत्थर का पर्यायवाची नहीं है?

A. ग्राव
B. पाषाण
C. अश्म
D. चक्षु

Q7. दिए गए शब्दों में कौनसा शब्द नदी का पर्यायवाची नहीं है?

A. निर्झरिणी
B. तरणी
C. तंरगिणी
D. सरिता

Q8. पुत्री का सही पर्यायवाची शब्द क्या है?

A. आत्मजा
B. पौत्रौ
C. गौरी
D. वत्सला

Q9. ‘ क्षीर ‘ का सही पर्यायवाची शब्द क्या है?

A. जल
B. खीर
C. अमृत
D. नीर

Hindi Grammar PDF Book LIVE WATCH

आप सभी students के सहूलियत को देखते हुए हमारी टीम ने decide किया है की अब से आप सबको बिना pdf download किये देखने का भी प्रबंध किया जाये, तो नीचे बने window में आपको हिंदी में Hindi Grammar PDF Hindi Vyakaran Book बेहतरीन हिंदी व्याकरण PDF को बिना download किये देखने को मिलेगा और उसके नीचे download pdf बटन भी दिया गया है जिसकी सहायता से आप बड़ी ही आसानी से हिंदी में Hindi Grammar PDF Hindi Vyakaran Book बेहतरीन हिंदी व्याकरण PDF  को download भी कर सकते है|

Hindi Grammar PDF Hindi Vyakaran Book  [1] बिना download किये देखे

Hindi vyakaran Book for Competition छन्द कि परिभाषा, भेद, उदाहरण सहित

छन्द किसे कहतें हैं इसके भेद कितने होतें है। आदि से सम्बन्धित आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको छन्द के बारे में सम्पूर्ण जानकारी बहुत ही सरल परिभाषा और उदाहरण के साथ लेकर आयें है। Students जैसा कि आप जानते है कि High School, में Intermediate में छन्द से सम्बन्धित प्रश्न पूछें जातें। इसलिए ये महत्वपूर्ण लेख हम आप के लिये लेकर आयें।

छन्द कि परिभाषा

छन्द कविता की स्वाभविक गति के नियम-बध्द रूप है। सामानय धरणा के अनुलार जातीय संगीत और भाषावृत्ति के आधार पर निर्मत लयादर्श की आवृत्ति को छन्द कहते है। छन्द में निश्चित मात्रा या वर्ण की गणना होती है। छन्द के आदि आचार्य पिंगल है। इसी से छन्द शास्त्र को पिंगलशास्त्र भी कहते है।

चरण

प्रत्येक छन्द चरणों में विभाजित होता है। इनको पद या पाद कहते है। जिस प्रकार मनुष्य चरणों पर चलता है, उसी प्रकार कविता भी चरणों पर चलती है। छन्द में प्रायः चार चरण होते है। जो सामान्यतः चार पंक्तियों में लिखे जाते है। किन्ही-किन्ही छन्दो में, जैसे- छप्पय, कुण्डलियाँ आदि में छह चरण होते है।

वर्ण और मात्रा Hindi Grammar Notes

वर्णों कि गणना करते समय वर्ण चाहे लघु हो अथवा गुरू, उसे एक ही मीनी जाता है, यथा -‘रम’ राम’,’रामा’ तीनों शब्दो में दो-दो वर्ण है। मात्रा से अभिप्राय उच्चारण के समय की मात्रा से है। गुरू में लघु की अपेक्षा दूना समय लगता है इसलिए मात्रओं की जहाँ गणना होती है वहाँ लघु की एक मात्रा होती है और गुरू की दो मात्राएँ होती है। लघु का संकेत खड़ी रेखा ‘।’ और गुरू का संकेत वक्र रेखा ‘s’ होता है। लघु के लिए ‘ल’ तथा गुरू के लिए ‘ग’ के संकेतो का भी प्रयोग होता है।

छन्द के प्रकार Hindi Grammar PDF

मात्रा और वर्ण के आधार पर छन्द मुख्यतया दो प्रकार के होते हैं-

  • मात्रिक छन्द
  • वर्णवृत छन्द

मात्रिक छन्द

मात्रिक छन्दों में केवल मात्राओं की व्यवस्था होती है, वर्णो के लघु और गुरू के क्रम का विशेष ध्यान नहीं रखा जाता। इन छन्दो के प्रत्येक चरण में मात्राओं की संख्या नियत रहती है। मात्रिक छन्द तीन प्रकार के होते हैं- सम,अर्धसम और विषम।

चौपाई छंद

यह एक मात्रिक छंद होता है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके हर चरण में 16 मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में गुरु या लघु नहीं होता है लेकिन दो गुरु और दो लघु हो सकते हैं। अंत में गुरु वर्ण होने से छंद में रोचकता आती है।

उदाहरण

ll ll Sl lll llSS
“इहि विधि राम सबहिं समुझावा
गुरु पद पदुम हरषि सिर नावा।”

दोहा

यह अर्धसममात्रिक छन्द है। यह सोरठा का विपरीत होता है। इसमें चार चरण होते है इसके विषम चरणों (पहले और तीसरे) में 13, 13 मात्राएं होती है। सम चरणों (दूसरे ओर चौथे) में 11, 11 मात्राएँ होती हैं। सम चरणों के अन्त में लघु पड़ना आवश्यक है एवं तुक भी मिलना चाहिए।

उदाहरण

S I I I I I I S I I I I I I I I I I I S I
श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि ।
बरनउं रघुवर विमल जस, जो दायक फल चारि ।।
I I I I I I I I I I I I I S S I I I I S I

सोरठा

यह मात्रिक अर्द्धसम छंद है। इसके विषम चरणों में 11मात्राएँ एवं सम चरणों में 13 मात्राएँ होती हैं । तुक प्रथम एवं तृतीय चरण में होती है। इस प्रकार यह दोहे का उल्टा छंद है।

उदाहरण

SI SI I I SI I S I I I I I S I I I
कुंद इंदु सम देह , उमा रमन करुनायतन ।
जाहि दीन पर नेह , करहु कृपा मर्दन मयन ॥
S I S I I I S I I I I I S S I I I I I

रोला

मात्रिक सम छंद है , जिसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं तथा 11 और 13 पर यति होती है। प्रत्येक चरण के अंत में दो गुरु या दो लघु वर्ण होते हैं। दो -दो चरणों में तुक आवश्यक है।

उदाहरण

I I I I SS I I I S I S S I I I I S
नित नव लीला ललित ठानि गोलोक अजिर में ।
रमत राधिका संग रास रस रंग रुचिर में ॥
I I I S I S SI SI I I SI I I I S

कुंडलियाँ छंद

कुंडलियाँ विषम मात्रिक छंद होता है। इसमें 6 चरण होते हैं। शुरू के 2 चरण दोहा और बाद के 4 चरण उल्लाला छंद के होते हैं। इस तरह हर चरण में 24 मात्राएँ होती हैं।

उदाहरण

SS I I S S I S I I S I SS S I
सांई अपने भ्रात को ,कबहुं न दीजै त्रास ।
पलक दूरि नहिं कीजिए , सदा राखिए पास ॥
सदा राखिए पास , त्रास कबहुं नहिं दीजै ।
त्रास दियौ लंकेश ताहि की गति सुनि लीजै ॥
कह गिरिधर कविराय राम सौं मिलिगौ जाई ।
पाय विभीषण राज लंकपति बाज्यौ सांई ॥
S I I S I I S I S I I I S S S S

हरिगीतिका

यह मात्रिक सम छंद हैं। प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं। यति 16 और 12 पर होती है तथा अंत में लघु और गुरु का प्रयोग होता है।

उदाहरण

कहते हुए यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए ।
हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए ॥
I I S IS S SI S S S IS S I I IS

बरवै

यह मात्रिक अर्द्धसम छंद है जिसके विषम चरणों में 12 और सम चरणों में 7 मात्राएँ होती हैं। यति प्रत्येक चरण के अन्त में होती है। सम चरणों के अन्त में जगण या तगण होने से बरवै की मिठास बढ़ जाती है।

उदाहरण

S I SI I I S I I I S I S I
वाम अंग शिव शोभित , शिवा उदार ।
सरद सुवारिद में जनु , तड़ित बिहार ॥
I I I I S I I S I I I I I I S I

वर्ण-वृत छन्द

जिन छन्दो कि रचना वर्णो की गणना के आधार पर की जाती है, उन्हे वर्ण-वृत या वार्णिक छन्द कहते है। वर्ण-वृतों के तीन मुख्य भेद है- सम, अर्ध्दसम,विषम।

इन्द्रवज्रा

वार्णिक समवृत्त , वर्णों की संख्या 11 प्रत्येक चरण में दो तगण ,एक जगण और दो गुरु वर्ण ।

उदाहरण –

होता उन्हें केवल धर्म प्यारा ,सत्कर्म ही जीवन का सहारा ।

सवैया छन्द

इसके हर चरण में 22 से 26 वर्ण होते हैं। इसमें एक से अधिक छंद होते हैं। ये अनेक प्रकार के होते हैं और इनके नाम भी अलग -अलग प्रकार के होते हैं। सवैया में एक ही वर्णिक गण को बार-बार आना चाहिए। इनका निर्वाह नहीं होता है।

उदाहरण

“लोरी सरासन संकट कौ,
सुभ सीय स्वयंवर मोहि बरौ।
नेक ताते बढयो अभिमानंमहा,
मन फेरियो नेक न स्न्ककरी।
सो अपराध परयो हमसों,
अब क्यों सुधरें तुम हु धौ कहौ।
बाहुन देहि कुठारहि केशव,
आपने धाम कौ पंथ गहौ।।”

विशेषण और इसके भेद (हिन्दी व्याकरण)

हम आप के लिए एक विशेष लेख विशेषण और इसके भेद, उदाहरण सहित लेकर आयें के इस लेख के माध्यम से हम आपको विशेषण कि परिभाषा इसके उदाहरण आदि से सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी देगे। तो हमारे इसे लेख ध्यान पढें और आगामी Exams में अच्छे अंक प्राप्त करे।

विशेषण कि परिभाषा

”जो शब्द किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम कि विशेषता बतातें हैं उन्हे विशेषण कहतें है।”

सार्वनामिक विशेषण अथवा संकेतवाचक विशेषण

जो सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा से ठीक पहले आकर उसकी तरफ संकेत करते है उन्हे सार्वनामिक विशेषण कहते है।

जैसे–

यह आदमी पागल है।

यह व्यक्ति चालाक है।

यह गाय मेंरी है।

वह नौकर नही आया।

उसने मुझे बुलाया।

संख्या वाचक विशेषण Hindi Grammar PDF

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम कि संख्या बताते है। उन्हें संख्यावाची विशेषण कहते है। यह तीन प्रकार का होता है।

  • निश्चित संख्या वाचक
  • अनिश्चित संख्या वाचक
  • परिणाम वाचक

निश्चित संख्यावाचक विशेषण

जिससे संज्ञा या सर्वनाम की संख्या के बारे में निश्चित रूप से बताया जाता है। कि इसकी इतनी संख्या है तो वहाँ पर निश्चित संख्यावाचक विशेषण होता है। इसके पाँच भेद होते है।

  • गणना वाचक विशेषण- एक, दो, तीन, चार, सौ………, पाव, आधा, पौन, सवा, ढाई, तिहाई…..।
  • क्रम वाचक विशेषण- पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पाँचवा, सौवाँ………….।
  • समुदाय वाचक विशेषण- दोनों, तीनों, सैकड़ों, हजारों………..।
  • आवृत्ति वाचक विशेषण- इकहरा, दोहरा, तिहरा, दोगुना, तिगुना, सौगुना, हजारगुना, लाखगुना……।
  • प्रत्येक बोधकवाचक विशेषण- जिन शब्दो के द्वारा प्रत्येक का बोध होता है। उसे प्रत्येक बोधक विशेषण कहते है। जैसे- हर एक
  • क्ति से मिलना है।, सवा-सवा किलो सेब लेते आना।

Hindi vyakaran Book for Competition अनिश्चित संख्या वाचक विशेषण

जिस विशेषण में संख्या के बारे में जानकारी न हो उसे संख्यावाचक विशेषण कहते है।

जैसे–

  • दंगो में बहुत से लोग घायल हुए है।
  • दुकान से थोड़ा पेन खरीदना है।
  • कुछ कुर्सी दे दीजिए।
  • कुछ व्यक्ति बाहर खड़े है।

निश्चिच परिणाम वाचक विशेषण Hindi Grammar PDF

जिसमें एक निश्चित मात्रा दी हो।

जैसे–

  • एक लीटर दूध लाओ।
  • तीन दर्जन केला देदो।
  • पाँच किलो चीनी चाहिए।
  • चार सौ गज जमीन चाहिए।

अनिश्चित परिणाम वाचक विशेषण Hindi Grammar PDF

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम के अनिश्चित परिणाम को बतातें है। उसे अनिश्चित परिणाम वाचक विशेषण कहतें है।

जैसे– थोड़ा, कुछ, बहुत, काफी, पूरा, लगभग, कितना, और, सब, कई, सारा, इतना, जितना, अत्यंत।

उदाहरण–

  • सब समान मेरा है।
  • पूरी जगह मेरी है।
  • सब धन लाना है।
  • काफी सामान बचा है।

Arihant Hindi Grammar Book PDF

इस Book को Arihant Publication द्वारा Publish किया गया है. जिसमे Hindi विषय की Complete जानकारी दी गई. इस PDF में क्या क्या है इसकी सूची हमने नीचे बना दी है.

  • हिन्दी भाषा का इतिहास एवं मुख्य तथ्य
  • वर्ण,उच्चारण एवं वर्तनी
  • शब्द भेद
  • पर्यायवाची शब्द
  • विलोमार्थक शब्द
  • अनेकार्थक शब्द
  • समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द
  • वाक्यांशों के लिये एक शब्द
  • हिन्दी व्याकरण
  • शब्द रचना
  • वाक्य
  • वाक्यगत अशुद्धियाँ और उनका शोधन
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